कुछ ऐैन हुए कुछ ग़ैन हुए
बस यूं समझो बेचैन हुए
दो चार जो बीते उसके संग
उन लमहों के कौनैन हुए
दो चार जो लिखनेवाले थे
आगे पीछे सब बैन हुए
कुछने नेहरू को गाली दी
बाकी नेहरू के फैन हुए
देखे क्या क्या फ़ितने मुशफ़िक़
आवाराकुन जब नैन हुए
मराठी गझल आणि कविता
मराठी गझल आणि कविता - अनंत ढवळे / Marathi Gazals and Poems by Anant Dhavavle Copyright © Anant Dhavale; Please do not reprint/use in any other media format without proper permission. Author contact - anantdhavale@gmail.com. A blog committed to Marathi Gazal and Poems
कुछ ऐैन हुए कुछ ग़ैन हुए
बस यूं समझो बेचैन हुए
दो चार जो बीते उसके संग
उन लमहों के कौनैन हुए
दो चार जो लिखनेवाले थे
आगे पीछे सब बैन हुए
कुछने नेहरू को गाली दी
बाकी नेहरू के फैन हुए
देखे क्या क्या फ़ितने मुशफ़िक़
आवाराकुन जब नैन हुए
कसनुसा वाहतो आहे
बोधाचा उरला-सुरला अर्थ
संस्कृतीच्या प्रभावहीन पाण्यासारखा
लालसा चालवत जाते आहे
बव्हंशी
आपल्या संवेदनेतले जग
संभोग, पैसा, सत्ता
एक बेईमानी वेढून आहे
नेहमीपासूनची
शहरे, गावे, डोंगर न समुद्र
पण हे असे नव्हते
असा
कुठलाही काळ नव्हता
कधीच
आता हे खोल-खोल संवाद
पाप, पुण्य, आचरण आणि इच्छेच्या
अर्थनिर्णयासारखे
अनावश्यक
..
अनंत ढवळे
माझ्या काही उर्दू गझल रेख्ताच्या वेबसाईटवर आहेत. इथे वाचता येतील.
https://www.rekhta.org/poets/anant-dhavale-mushfiq/ghazals